रेजिडेंट रॉयल्स की आर्चर को बचानेकर रखने की रणनीति खुद पर ही पड़ी भारी!

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राजस्थान रॉयल्स के गेंदबाज जोफ्रा आर्चर ने गुरुवार, अप्रैल 04,2019 को जयपुर, राजस्थान, भारत में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के खिलाफ इंडियन प्रीमियर लीग आईपीएल 2019 के मैच से पहले अभ्यास सत्र के दौरान एक गेंद फेंक दी। छवियाँ) संपादकीय उपयोग के लिए संरक्षित छवि – पूरी तरह से कोई व्यावसायिक उपयोग (विशाल भटनागर द्वारा फोटो / गेटी इमेज के माध्यम से नूरफोटो)

अंतिम ओवर के लिएजोफरा आर्चर को बचानेकर रखने की रणनीति रेटेड रॉयल्स के लिए गलत साबित हुई। आखिरी 2 ओवर में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर को जीत के लिए 35 रनों की जरूरत थी। 19 वें और मेगा ओवर में एबी डिविलियर्स के खिलाफ गेंदबाज़ी करने के लिए स्टीवन स्मिथ के पास दो गेंदबाज़ थे- जोफ़रा आर्चर और जयदेव उनादकट।

19 वें ओवर में गेंदबाज़ी करने से पहले जयदेव उनादकट ने 3 ओवर में 21 रन दिए थे और उन्हीं के हाथों में राजस्थान रॉयल्स के कप्तान ने गेंद थमा दी थी। शायद यही इस मैच की टर्निंग पॉइंट रही। क्योंकि मॉडर्न डे क्रिकेट में रन डिफेंड करते वक़्त इस तरह की परिस्थिति में अक्सर टीम के नंबर वन गेंदबाज़ों को ही 19 वें ओवर में गेंदबाज़ी कराने का ट्रेंड है। बैट्समैन के लिए यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि बस्ट बॉलर के खिलाफ 19 वें ओवर में ही ऑल आउट अटैक करें या फिर उससे कमज़ोर गेंदबाज़ के खिलाफ एड ओवर में ज़्यादा रन बनाने के लिए कोशिश करें।

लेकिन यहां स्टीव स्मिथ ने 19 वे ओवर में उनादकट को गेंदबाज़ी का ज़िम्मा सौंप दिया और डिविलियर्स ने पहली तीन गेंदों में तीन सिक्सर मार दिए। वहां से मैच पूरी तरह से आरसीबी की तरफ चला गया।

एक तो बाएं हाथ के गेंदबाज़ों के खिलाफ डेथ ओवर्स में डिविलियर्स का रिकॉर्ड काफी अच्छा है। दूसरी तरफ ये प्रदर्शन गेंदबाज़ जोफरा आर्चर अगर 19 वें ओवर में 12/14 रन भी दे दे तो टीम ओवर में 20 से ज़्यादा रन बनाना आसान नहीं होता क्योंकि इसमें बलेबाज़ के ऊपर दवाब ज़्यादा रहता है, ऐसा ही देखा गया है।

मैच में आर्चर को जब नाक ओवर में गेंदबाज़ी का मौका मिला तो उनके हाथ में डिफेंड करने के लिए सिर्फ 10 ही रन थे और आर्चर इसको डिफेंड कर भी नहीं पाएं हैं। वैसे तो टी 20 क्रिकेट में किसी भी प्लानिंग को 100 प्रति सही या गलत नहीं कहा जा सकता है। लेकिन कहीं न कहीं जोफरा आर्चर अगर 19 वें ओवर में गेंदबाज़ी करने आते तो बैंगलोर के लिए मैच जीतना शायद मुश्किल होता।

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