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डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए सही समय पर भोजन करना जरूरी, इन बातों का रखें ध्यान

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दुनियाभर में पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से कोरोना का संकट जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस दौरान कोरोना के साथ-साथ कई और गंभीर रोगों के मरीजों के मामले भी बढ़े हैं। इतना ही नहीं कोरोना के दौर में इलाज की अनुपलब्धता के कारण कई लोगों में बीमारियां गंभीर रूप लेती हुई भी देखी गई हैं। डायबिटीज की समस्या भी ऐसी ही है, डॉक्टर कहते हैं कोरोना के दौर में उचित इलाज के अभाव में ज्यादातर लोगों में डायबिटीज की स्थिति गंभीर रूप में पहुंच गई है। तमाम रोगियों में टाइप-2 डायबिटीज का निदान हो रहा है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर समस्या के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक टाइप-2 डायबिटीज के कारण कई तरह के अन्य क्रोनिक बीमारियों और मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है, लोगों में बढ़ती यह समस्या काफी गंभीर हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, टाइप-2 डायबिटीज सीधे तौर पर हमारी दैनिक आदतों जैसे आहार और जीवन शैली में गड़बड़ी के कारण होने वाली समस्या है। अगर समय रहते आदतों में सुधार कर लिया जाए तो इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहा जा सकता है। खाने की उचित समय-सारिणी का पालन करके इस रोग के खतरे को कम किया जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

डायबिटीज को क्यों माना जाता है खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज को ‘साइलेंट किलर’ के रूप में वर्गीकृत करते हैं, उसपर टाइप-2 डायबिटीज और भी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर शर्करा (ग्लूकोज) को ठीक से संसाधित नहीं कर पाता है। मधुमेह से प्रभावित लोगों में अग्न्याशय या तो पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है या शरीर इसके लिए प्रतिरोधी हो जाता है। ऐसी स्थिति में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है और रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। समय के साथ हाई ब्लड शुगर का स्तर धमनियों को प्रभावित कर सकता है जिसके कारण हृदय रोग, स्ट्रोक और आंखों की समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

डायबिटीज में कैसा रखें खान-पान?
शुगर का किसी भी रूप में अधिक सेवन टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है। यही कारण है कि अग्न्याशय या इंसुलिन की आपूर्ति को बेहतर रखने के लिए लोगों को चीनी का सेवन कम करने को कहा जाता है। कुछ प्रकार के फलों का सेवन भी डायबिटीज में नुकसानदायक हो सकता है। फलों में फ्रुक्टोज के रूप में प्राकृतिक शर्करा होती है जिसका बहुत अधिक सेवन भी नुकसानदायक हो सकता है।

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मीठे पेय पदार्थ, कार्बोनेटेड सोडा, रिफाइंड कार्ब्स जैसे कुकीज़, चिप्स, ब्रेड और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में रिफाइंड शुगर होती है, इसका भी अधिक सेवन नुकसानदायक माना जाता है। डायबिटीज के रोगियों को साबुत अनाज, सब्जियों के साथ कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली चीजों का सेवन करना चाहिए।

डायबिटीज में भोजन के समय की महत्ता
तमाम अध्ययन बताते हैं कि आहार और व्यायाम, टाइप-2 डायबिटीज के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ खाना खाने का समय भी ऐसे लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। पौष्टिक और भरपूर नाश्ते के साथ सही समय पर भोजन करना डायबिटीज के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

एक नए अध्ययन के अनुसार, दिन की शुरुआत में पौष्टिक और भरपूर नाश्ता करने से टाइप-2 मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिज्म संबंधी विकारों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। एंडोक्राइन सोसाइटी की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए गए अध्ययन के परिणामों से पता चला कि जिन लोगों ने सुबह 8.30 बजे से पहले नाश्ता किया था उनमें रक्त शर्करा का स्तर और इंसुलिन प्रतिरोध कम था।

डायबिटीज रोगी इन बातों का रखें ध्यान
डायबिटीज रोगियों को क्या खाना चाहिए, से ज्यादा क्या नहीं खाना चाहिए, इसपर ध्यान देना चाहिए। जब चीनी के सेवन को प्रबंधित करने की बात आती है, तो ऐसे रोगियों को सभी प्रकार के मीठे पेय पदार्थों से बिल्कुल परहेज करना चाहिए। क्लीवलैंड क्लिनिक जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार नियमित व्यायाम के साथ स्वस्थ आहार का सेवन करके डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है। यह इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार करने, स्वस्थ बॉडी मास इंडेक्स बनाए रखने और मांसपेशियों का निर्माण करने में मदद करने में भी सहायक है।

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