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Angarki Sankashti Chaturthi 2021: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कल, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व

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Angarki Sankashti Chaturthi 2021: अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कल, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व

सकट चौथ 2020, (Photo Credits: Pixabay)

Angarki Sankashti Chaturthi 2021: देवताओं में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश (Bhagwan Ganesh) को हर माह की चतुर्थी तिथि अत्यंत प्रिय है. हर महीने पड़ने वाली चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) कहा जाता है, जबकि अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी (Vianayak Chaturthi) कहा जाता है. खासकर चतुर्थी तिथि मंगलवार को पड़े तो उसे अंगारकी चतुर्थी (Angarki Sankashti Chaturthi) कहते हैं और इस बार अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2 मार्च 2021 (मंगलवार) को पड़ रही है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी के नाम से जाना जाता है और इसका विशेष महत्व बताया जाता है. इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की आराधना की जाती है. कहा जाता है कि गणेश जी के द्विजप्रिय रूप के चार मस्तक और चार भुजाए हैं. उनके इस स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और अच्छी सेहत व सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. चलिए जानते हैं अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका महत्व.

अंगारकी संकष्टी चतुर्थी 2021

संकष्टी चतुर्थी तिथि- 2 मार्च 2021 (मंगलवार)

चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 02 मार्च 2021 को सुबह 05:46 बजे से,

चतुर्थी तिथि समाप्त- 03 मार्च 2021 की रात 02:59 बजे तक.

संकष्‍टी चतुर्थी की पूजा विधि

  • संकष्टी चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, फिर व्रत का संकल्प लें.
  • अब एक चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें.
  • उत्तर दिशा में मुंह करके गणेश जी की पूजा करें और उन्हें तिल मिश्रित जल अर्पित करें.
  • दिन भर व्रत रखें और शाम के समय विधिवत भगवान गणेश की पूजा करें.
  • पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें, लेकिन गलती से भी उन्हें तुलसी न चढ़ाएं.
  • फिर उन्हें शमी का पत्ता, बेलपत्र, तिल के लड्डुओं और मोदक का भोग अर्पित करें.
  • अब चंद्रमा को अर्घ्य दें और तिल के लड्डू या तिल खाकर अपना व्रत खोलें.
  • इस दिन जमीन के भीतर होने वाले कंद-मूल यानी मूली, प्याज, गाजर, चुकंदर न खाएं.

संकष्‍टी चतुर्थी का महत्‍व

संकष्टी चतुर्थी का मतलब है संकटों को हरने वाली पावन तिथि. मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से समस्त परेशानियां दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. अगर यह तिथि मंगलवार को पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना अधिक बढ़ जाता है. मंगलवार को पड़ने वाली अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उनके सभी संकट दूर होते हैं.

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