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हैप्पी बर्थडे रेखा:मेकअप एकेडमीज के कोर्स में पढ़ाई जाती है रेखा की खूबसूरती, 65 पार उम्र लेकिन स्किन 35 साल जैसी, खुद ने भी लंदन से किया मेकअप कोर्स

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आज अपने जमाने की टॉप एक्ट्रेस रेखा का 67वां जन्मदिन है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी खूबसूरती एक मिसाल है। कम ही लोग जानते हैं कि कई बड़ी मेकअप एकेडमीज में रेखा की खूबसूरती को बतौर कोर्स पढ़ाया जाता है। इसकी वजह भी है, उनकी स्किन सामान्य नहीं है, उसे ग्लास स्किन कहा जाता है, जो सबसे बेहतरीन मानी गई है। 65+ की उम्र में भी उनकी स्किन 35 साल की महिला जैसी है।

फिल्म इंडस्ट्री के लिए रेखा हमेशा एक रहस्य रही हैं। रेखा अपना मेकअप खुद करती हैं। बाकायदा उन्होंने लंदन से इसके कोर्स किए हैं। लंदन से कोर्स किए जाने की वजह पर बॉलीवुड-हॉलीवुड इंटरनेशनल मेकअप एंड हेयर एकेडमी मुंबई के एमडी विवेक भारती बताते हैं कि रेखा के जमाने में भारत में मेकअप एकेडमी हुआ नहीं करती थी और दुबई तब डेवलप नहीं था।

बेहतरीन कोर्स करने के लिए लोग लंदन या लॉस-एंजेलिस जाते थे। रेखा के खुद मेकअप सीखने की वजह यह भी बताई जाती है कि बॉलीवुड में मेकअप मैन मेल (पुरुष) ही होते थे। अब भी वर्चस्व उनका ही है। भारती का कहना है कि हम और हमारे जैसी सभी एकेडमी में रेखा के मेकअप को बाकायदा एक कोर्स की तरह पढ़ाया जाता है। क्योंकि रेखा के अलावा मेकअप में आज भी कोई बेहतरीन मिसाल नहीं है।

अगर पेंटिंग सुंदर बनानी है तो दीवार या कैनवास का सुंदर, प्लेन, मखमली होना जरूरी है। ऊबड़ खाबड़ कैनवास पर खूबसूरत पेंटिंग नहीं बन सकती है, यही फॉर्मूला रेखा के मेकअप का है, रेखा कि स्किन आज भी इतनी अच्छी है कि उस पर मेकअप और खूबसूरत लगता है। नियम है कि सुंदर स्किन पर ही मेकअप सुंदर दिखता है।

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रेखा की पहचान, कांजीवरम की साड़ियां

अब बात करते हैं रेखा की कांजीवरम साड़ियों की, तो कांजीवरम सिल्क साड़ी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन, कांचीपुरम के सचिव सुंदरम बताते हैं कि रेखा ने कांजीवरम को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में मशहूर किया है। रेखा जिस तरह की फुल गोल्ड-सिल्वर जरी वाली कांजीवरम साड़ियां पहनती हैं, उनकी कीमत डेढ़ से दो लाख रुपए तक है।

सुंदरम का कहना है कि रेखा के कांजीवरम पहनने की वजह है, एक तो वे तमिलनाडु की रहने वाली हैं, दूसरा कांजीवरम सिल्क बहुत प्योर मानी जाती है, जो स्किन के लिए बहुत अच्छी होती है। जहां तक खरीदारी की बात है तो कांजीवरम साड़ियों के बड़े स्टोर चेन्नई में ही हैं।

हैंडूलम सिल्क साड़ी, कांचीपुरम के ट्रेजरार राजेंद्रम बताते हैं कि ऐसी साड़ियों को बनाने में लगभग एक से डेढ़ महीना लगता है। यह पूरी तरह हाथ से बनाई जाती हैं। इन साड़ियों का 500 साल का इतिहास है। गौरतलब है कि तमिलनाडु में कांचीपुरम एक ऐसी जगह है, जहां घर घर में कांजीवरम साड़ियां बनती हैं।

 

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