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रेखा के बर्थडे पर सुमन:रेखा के साथ अपने शूटिंग एक्सपीरिएंस पर शेखर सुमन बोले- ‘उत्सव’ में इरॉटिक सीन देने में पसीने छूट जाते थे

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  • रेखा के साथ इंटीमेट सीन देने में मैं लड़खड़ा रहा था
  • रेखा के घर इनकम टैक्स की वो सबसे बड़ी रेड थी

मृच्छकटिकम नाटक पर कामसूत्र के खूबसूरत प्रयोग के साथ रेखा और शेखर सुमन की इरॉटिक फिल्म ‘उत्सव’ भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्म है। इसमें उन 64 कलाओं को सिल्वर स्क्रीन पर खूबसूरती से उतारा गया जो वात्सायन के कामसूत्र का आधार थे। साल 1984 में आई यह फिल्म शेखर सुमन की डेब्यू फिल्म थी। रेखा जैसी दिग्गज और मंझी अदाकारा के सामने भी किसी शेखर सुमन जैसे नए कलाकार का खड़ा होना भी मुश्किल था। ऐसे में इस इरॉटिक फिल्म में उन्हें रेखा के साथ कई इंटीमेट सीन देने थे। वह बताते हैं मेरे लिए वह सबसे ज़्यादा मुश्किल था।

रेखा के साथ अंग्रेजी वाली ‘उत्सव’ में ज्यादा इरॉटिक सीन
यह फिल्म हिंदी और इंटरनेशनल सिनेमा के लिए अंग्रेजी में बनी। इसलिए एक सीन की शूटिंग दो बार होती थी। अंग्रेजी में बनने वाली फिल्म हिंदी के मुकाबले ज्यादा इरॉटिक सीन थे। फिल्म में ग्लैमर, खूबसूरती, टैलेंट और इरॉटिक सीन के चलते रेखा को आज भी याद किया जाता है। शेखर सुमन बताते हैं कि फिल्म के प्रोड्यूसर शशि कपूर और निदेशक गिरीश कर्नाड ने मुझे रेखा के अपॉजिट 16 अदाकारों में से चुना था। लेकिन सभी को रेखा की हामी का इंतजार था। क्योंकि फिल्म में जिस तरह के इंटीमेट सीन थे तो सभी शंकित थे कि रेखा शेखर सुमन जैसे नए कलाकार के लिए मानेंगी या नहीं। शेखर के मुताबिक ‘अगर रेखा मेरे लिए मना कर देती तो पता नहीं आज मैं इंडस्ट्री में होता भी या नहीं क्योंकि ‘उत्सव’ मेरे लिए मील का पत्थर साबित हुई, जिसके लिए मैं रेखा का हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा। शशि कपूर का भी जिन्होंने मेरे जैसे नए कलाकार पर भरोसा कर रिस्क लिया। ‘

रेखा ने हर सीन में सपोर्ट किया
फिल्म में रेखा एक नगरवधु (गणिका) वसंतसेना के रोल में है। पुरात्न भारत में नगरवधु को बहुत इज्जत मिलती थी। उसे मूर्ख राजा की बजाय गरीब शेखर सुमन से मोहब्बत हो जाती है। शेखर सुमन बताते हैं कि शूटिंग के वक्त रेखा समझ गईं थी कि मैं इंटीमेट सीन देने में लड़खड़ा रहा हूं। इसलिए शूटिंग से पहले उन्होंने मुझसे खूब बातें की, मुझे अपने साथ इजी किया। शेखर के मुताबिक अपने काम को लेकर रेखा जैसी प्रोफेशनल एक्ट्रेस शायद ही कोई हो, रेखा का कहना था कि गिरीश कर्नाड और शशि कपूर ने अगर शेखर सुमन को चुना है तो कुछ सोचकर चुना होगा। उन्होंने इसपर रत्ती भर सवाल नहीं किया। रेखा ने एक जूनियर की तरह शेखर सुमन को हर सीन में सपोर्ट किया।

जब रेखा ने किसी बात से मना नहीं किया
शेखर सुमन का कहना है कि इंटीमेट सीन देते हुए एक दफा रेखा ने यह नहीं कहा कि यहां हाथ नहीं लगाना है, वहां नहीं छूना है, यह क्या कर रहे हो। रेखा ने इस तरह से सुपर प्रोफेशनल बिहेव किया की मैं इंटीमेट सीन देने में इजी होता चला गया। कोई डू-डोंट नहीं। वह कहते हैं कि उत्सव जगह जगह प्रीमियर हुए, मैं हमेशा रेखा की बगल में खड़ा रहता, वह बराबरी का दर्जा देती थीं। कभी अहसास तक नहीं करवाया कि मैं उनसे 15 साल जूनियर हूं। उत्सव के बाद जितनी फिल्में की वह एक तरफ और रेखा के प्रोफेशन्लिजम के चलते अकेली ‘उत्सव’ एक तरफ।

जब रेखा के घर इनकम टैक्स की रेड पड़ी तो हमारे होश उड़ गए
रेखा के प्रोफेशनल्जिम पर शेखर सुमन बताते हैं कि मंगलौर के कुंदापुर में इस फिल्म की शूटिंग का पहला दिन था कि रेखा के घर इनकम टैक्स की बहुत बड़ी रेड पड़ गई। उस वक्त न तो मोबाइल थे और न ही लैंडलाइन। सभी तनाव में आ गए कि अब क्या होगा, रेखा तो चली जाएंगी जबकि पूरा क्रू यहां शूटिंग के लिए आया हुआ है। रेखा ने बिना आंख झपकाए शशि कपूर से कहा कि आप शूटिंग शुरू करें, मैं शूटिंग खत्म होने पर ही मुंबई जाउंगी क्योंकि आपका बहुत नुकसान हो जाएगा। रेखा एक महीने की शूटिंग खत्म करके ही मुंबई लौटीं। शेखर सुमन के अनुसार उनकी जगह कोई भी और होता तो फौरन वहां से अपने घर भाग जाता। लेकिन यह प्रोफेशनल्जिम की हद थी।

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रेखा मोहब्बत से भरी हुई हैं
शेखर सुमन बताते हैं कि मैं जितना रेखा को जानता हूं वह मोहब्बत से भरी हुई हैं। रुहानी मोहब्बत ने उन्हें उम्र के दायरे से बाहर कर दिया है। खुदा ऐसी एजलेस लाइफ किसी किसी को देता है। वह आज भी वसंतसेना हैं। जबकि फिल्मों के शुरूआती दिनों में वह एक सांवले रंग की खास न दिखने वाली अदाकार थीं। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अपने को सजाया, संवारा और एक ऐसी रूहानी ताकत से अपने को रोशन किया कि आज तक चमक रही हैं। रेखा अपने आप से और अपने काम से बहुत प्यार करती हैं। अच्छे खानपान के बावजूद लोग उम्र के दायरे में फंस जाते हैं लेकिन रेखा दिल और दिमाग से बहुत मजबूत और आज भी खूबसूरत हैं क्योंकि वह अंदर से मोहब्बत से भरी हुई हैं।

कुछ यादें पुरानी नहीं होती
शेखर सुमन के अनुसार रेखा के साथ जिसने भी काम किया होगा वह कभी उन्हें नहीं भूला होगा। कुछ यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। जिंदगी का अहम हिस्सा होती हैं। उत्सव में रेखा के साथ काम करना ऐसा ही है।

 

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