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तकरार, नाराजगी से शुरू हुई जगजीत-चित्रा की गजल एक रोज मुकम्मल हो गई

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‘गुनगुनाता था तो खुलते हुए बादल की तरह, मुस्कुराहट में कई तरबों की झनकार छुपी थीं.’

लफ्जों के कारीगर गुलजार (Gulzar) ने अपनी ये नज्म जगजीत सिंह के नाम लिखा है.

 

इस नज्म को पढ़ते ही इस बात का अहसास होता है कि जगजीत (Jagjit singh) भले ही हमारे बीच नहीं हों लेकिन उनकी आवाज में एक जादू था. एक ऐसा जादू जिसे सुनकर लगता है कि किसी ठंडी हवा के तेज झोंका ने हमें अंदर से छेड़ दिया हो. यही वजह है कि आज भी उन्हें सुनते ही लोग किसी पेंड़ की टहनी की तरह झूमने लगते हैं. राजस्थान के गंगानगर में पैदा हुए गजल सम्राट जगजीत सिंह (Jagjit singh) ने 10 अक्टूबर 2011 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. जगजीत सिंह की आज 10वीं पुण्‍यतिथि है. ऐसे में आइए उनके जीवन से जुड़े अहम किस्से जानते हैं.

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’70 साल तक गाना चाहता हूं’
जगजीत ने अपने निधन से कुछ दिनों पहले एक साक्षात्कार में कहा था, ‘मैं 70 साल की उम्र तो गाना चाहता हूं. उसके बाद देखेंगे कि क्या गाने की हिम्मत बची है या नहीं. पर हिम्मत न भी हुई तो भी रियाज तो करेंगे ही, कंसर्ट में भले ही न गाएं. यह कहते हुए जगजीत सिंह मुस्कराने लगे थे. यह अजब इत्तेफाक है कि जगजीत ने अपने फैंस से जो वादा किया था उसे उन्होंने पूरा किया और फिर सत्तर साल की उम्र में ही उनकी आवाज हमेशा के लिए शांत हो गई.

 

1980 के दशक में जगजीत और चित्रा का साथ
चाशनी में लिपटी आवाज के जादूगर जगजीत सिंह को 1980 के दशक में चित्रा का साथ मिला, फिर दोनों ने मिलकर ‘द अनफॉरगेटेबल्स’ एलबम के लिए गाना गाया. कई सारे वीडियोज में चित्रा और जगजीत को आपस में संगत बिठाकर डूबकर गाते हुए देखा जा सकता है. स्टेज पर दोनों को साथ देखना भी कम सुकून नहीं देता था.

गजल के बीच संवाद का बेहतरीन अंदाज
गजलों में जगजीत सिंह की आवाज जितनी गंभीर और वजनदार महसूस होती थी उनके लाइव शो में उनके द्वारा बनाया गया माहौल उतना ही मजेदार और हल्का-फुल्का होता था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बार किसी ने उनसे पूछा था कि आप गजल के बीच में जोक्स क्यों सुनाते हैं? तो उनका जवाब था, ‘ऑडियंस से कनेक्ट करना होता है. सिर्फ गाने से आप कनेक्ट नहीं कर सकते. हैवी गजल सुनाने के लिए और उनसे कनेक्ट करने के लिए ऐसा करना होता है.

जब चित्रा के पति से शादी की इजाजत लेने पहुंचे जगजीत सिंह
चित्रा अपने पति देबू प्रसाद दत्ता और बेटी मोना के साथ मुंबई में रहती थीं. देबू को साउंड रिकोर्डिंग का बहुत शौक था. वक्त न मिलने की वजह से उन्होंने अपने घर में ही रिकोर्डिंग स्टूडियो बनवा लिया था. इसी स्टूडियो में गाना गाने के लिए एक बेहद टाइट पैंट पहने एक नौजवान लड़का आया था. पहली नजर में जगजीत को देखकर देर तक हंसने वाली चित्रा को बाद में इसी लड़के से प्यार हो गया.

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तकरार, नाराजगी से शुरू हुई जगजीत और चित्रा की गजल एक रोज मुकम्मल हो गई. ये बात सुनने में चाहे किसी को कितनी भी अजीब लगे लेकिन जगजीत सिंह की मासूमियत देखिए, वो चित्रा से शादी करने की इजाजत लेने के लिए चित्रा के पूर्व पति देबू के पास पहुंच गए. इस पर देबू ने मुस्कुराते हुए कहा ‘मैं अब आगे निकल चुका हूं. चित्रा अपने फैसले लेने के लिए आजाद है.’

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